लेवको लुक्यानेंको: जीवन, संघर्ष और यूक्रेन की स्वतंत्रता में योगदान
लेवको ह्रीगोरोविच लुक्यानेंको एक प्रमुख यूक्रेनी राजनीतिक नेता, मानवाधिकार कार्यकर्ता, सोवियत युग के dissident और यूक्रेन की स्वतंत्रता की घोषणा के एक लेखक थे। उनका नाम मानवाधिकार, लोकतंत्र और यूक्रेनी राष्ट्रवाद के लिए अडिग संघर्ष से जुड़ा हुआ है।
जीवनी
लेवको लुक्यानेंको का जन्म 24 अगस्त 1928 को चेरनीहिव क्षेत्र के ख्रिपिव्का गांव में हुआ था। स्कूल की पढ़ाई खत्म करने के बाद, उन्होंने लविव विश्वविद्यालय में कानून की पढ़ाई शुरू की। हालांकि, उनकी असली calling यूक्रेन की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष था, जो सोवियत शासन से टकराव का कारण बना।
विद्रोही गतिविधि
लुक्यानेंको यूक्रेनी श्रमिक-किसान संघ (URSS) के संस्थापकों में से एक थे, जो यूक्रेन के सोवियत संघ से शांति पूर्वक अलग होने का पक्षधर था। 1961 में उन्हें गिरफ्तार किया गया और मौत की सजा सुनाई गई, जिसे बाद में 15 साल की सजा में बदला गया।
रिहाई के बाद, उन्होंने संघर्ष जारी रखा और यूक्रेनी मानवाधिकार आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक बन गए। 1970 और 1980 के दशकों में उन्हें फिर से “एंटी-सोवियत गतिविधियों” के आरोप में गिरफ्तार किया गया। उन्होंने कुल मिलाकर 25 से अधिक वर्षों तक जेलों और श्रमिक शिविरों में बिताए।
स्वतंत्र यूक्रेन में राजनीतिक गतिविधि
यूक्रेन की स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद, लुक्यानेंको संसद के सदस्य बने और यूक्रेनी राज्य व्यवस्था के निर्माण में सक्रिय रूप से योगदान दिया। 1991 में, उन्होंने ही यूक्रेन की स्वतंत्रता की घोषणा का पाठ पढ़ा।
वह यूक्रेन के कनाडा में राजदूत भी रहे और मानवाधिकार कार्यों में शामिल रहे। 1992 में उन्हें यूक्रेन का हीरो के खिताब से नवाजा गया।
विरासत और महत्व
लेवको लुक्यानेंको ने न केवल एक विशाल राजनीतिक विरासत छोड़ी, बल्कि यूक्रेन के इतिहास, मानवाधिकारों और स्वतंत्रता के संघर्ष पर कई रचनाएं भी लिखीं। उनकी शख्सियत प्रतिरोध, देशभक्ति और यूक्रेनी राष्ट्रीयता में विश्वास का प्रतीक है।
लुक्यानेंको 7 जुलाई 2018 को निधन हो गए, लेकिन उनकी यूक्रेन की स्वतंत्रता में योगदान हमेशा यूक्रेनी जनता की यादों में रहेगा।








